उसी समय दूषण नाम का एक शक्तिशाली राक्षस नगरवासियों को सताने लगा। उसने यज्ञ, पूजा और धर्म के कार्यों पर रोक लगा दी। भयभीत लोगों ने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की।
भक्तों की पुकार सुनकर धरती फटी और एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई। उस ज्योति से स्वयं भगवान शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए। उन्होंने राक्षस दूषण का संहार कर भक्तों की रक्षा की।
नगरवासियों ने भगवान से प्रार्थना की कि वे हमेशा उज्जैन में निवास करें। भक्तों के प्रेम से प्रसन्न होकर शिव वहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। यही पवित्र स्थान आज Mahakaleshwar Jyotirlinga के नाम से प्रसिद्ध है, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
आज भी लाखों श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं और विश्वास करते हैं कि महाकाल अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं।
जय श्री महाकाल!