June 23, 2026

Prayagraj Mahakumbh History

Prayagraj Mahakumbh History
  • प्रयागराज महाकुंभ आस्था, इतिहास और मानवता के सबसे बड़ा उत्सव।
  • देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के 12 वर्ष के बराबर होते हैं
  • इसलिए हर 12 वर्ष में महाकुंभ का आयोजन होता है।

हजारों वर्ष पहले, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब अमृत कलश प्राप्त हुआ। अमृत पाने के लिए दोनों के बीच भयंकर संघर्ष छिड़ गया, जो 12 दिव्य दिनों तक चला। इस दौरान अमृत की बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों—हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज—में गिरीं।

देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के 12 वर्ष के बराबर होते हैं, इसलिए हर 12 वर्ष में महाकुंभ का आयोजन होता है। ऐतिहासिक रूप से, महान चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सम्राट हर्षवर्धन के समय (7वीं शताब्दी) में इस मेले का लिखित वर्णन किया था। बाद में आदि शंकराचार्य ने साधु-संतों को संगठित करने के लिए अखाड़ों की व्यवस्था शुरू की।

प्रयागराज, जहां पवित्र गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, सबसे पवित्र तीर्थ माना गया। मान्यता है कि यहां स्नान करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

समय के साथ कुंभ की परंपरा विकसित हुई, और हर 12 वर्षों में महाकुंभ का भव्य आयोजन होने लगा। सदियों से राजा, संत, नागा साधु और करोड़ों श्रद्धालु संगम तट पर एकत्र होकर आस्था का महापर्व मनाते आए हैं।

आज प्रयागराज महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम माना जाता है, जहां करोड़ों लोग एकता, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत दर्शन करते हैं।

प्रयागराज महाकुंभ आस्था, इतिहास और मानवता के सबसे बड़ा उत्सव।