8 मई 2028 (सोमवार) को उज्जैन सिंहस्थ कुंभ मेला का
तृतीय और अंतिम शाही स्नान (महा अमृत स्नान) संपन्न होगा।
यह पूरे दो महीने चलने वाले इस महासंगम (27 मार्च से 27 मई 2028)
का सबसे महत्वपूर्ण और समापन शाही स्नान है।
यह पावन स्नान उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के तटों पर वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) के महामुहूर्त पर आयोजित किया जाता है।
मुख्य विवरण (Key Details)
- तारीख और दिन: 8 मई 2028, सोमवार
- शुभ तिथि: वैशाख शुक्ल पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा
- स्थान: राम घाट, दत्त अखाड़ा घाट और नरसिंह घाट, उज्जैन
- समय: सुबह 3:30 - 4:00 बजे से अखाड़ों की अंतिम शाही यात्रा (पेशवाई) और नागा साधुओं के प्रवेश के साथ शुरू।
इस दिन का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
- पूर्णाहुति का प्रतीक: यह सिंहस्थ कुंभ का आखिरी शाही स्नान होता है। इसके बाद सभी 13 अखाड़ों के साधु-संत अपनी छावनियां समेटना शुरू करते हैं।
- अंतिम दिव्य आशीर्वाद: मान्यताओं के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा के दिन शिप्रा नदी का जल पूरी तरह अमृत के समान हो जाता है। इस दिन डुबकी लगाने से पिछले सभी जन्मों के पापों का नाश होता है।
- अभूतपूर्व जनसैलाब: चूंकि यह अंतिम शाही स्नान है, इसलिए इस दिन सबसे ज्यादा भीड़ (लगभग करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना) उमड़ती है।
यात्रा और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियाँ
यदि आप इस अंतिम शाही स्नान में शामिल होने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- कड़ा ट्रैफिक डायवर्शन: सुरक्षा और अत्यधिक भीड़ के कारण प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र (Mela Zone) से कई किलोमीटर पहले ही सभी निजी वाहनों को रोक देता है। आपको घाटों तक पहुँचने के लिए केवल शटल बसों या पैदल मार्ग का सहारा लेना होगा।
- पहले से बुकिंग अनिवार्य: इस अंतिम सप्ताह में उज्जैन के सभी होटल्स, धर्मशालाएं और सरकारी टेंट सिटी (Tent Cities) पूरी तरह से फुल रहते हैं। [1, 2]
- नजदीकी एयरपोर्ट व रेलवे: उज्जैन रेलवे स्टेशन से देश के कई हिस्सों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं। हवाई मार्ग के लिए इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट (IDR) सबसे सुगम माध्यम है।