June 23, 2026

Haridwar Kumbh History

Haridwar Kumbh History
  • गंगा, आस्था और अमृत की अमर परंपरा।

हजारों वर्ष पहले, समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों को अमृत कलश प्राप्त हुआ। अमृत की रक्षा के लिए देवताओं और असुरों के बीच 12 दिव्य दिनों तक संघर्ष चला। इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरीं, जिनमें हरिद्वार भी शामिल था।

हिमालय की गोद में बसा हरिद्वार, वह पवित्र स्थान है जहां मां गंगा पहली बार मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती हैं। मान्यता है कि हर की पौड़ी के आसपास अमृत की बूंदें गिरी थीं, जिससे यह भूमि अत्यंत पवित्र बन गई।

सदियों से संत, महात्मा, नागा साधु और करोड़ों श्रद्धालु यहां कुंभ मेले में भाग लेने आते हैं। पवित्र गंगा में स्नान कर लोग आत्मशुद्धि, पुण्य और मोक्ष की कामना करते हैं।

कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और एकता का विशाल उत्सव है। हरिद्वार कुंभ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सनातन परंपरा की भव्यता का अनुभव करते हैं।

गंगा, आस्था और अमृत की अमर परंपरा।